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रात का पहरेदार


गाँव के बाहरी हिस्से में एक पुरानी हवेली थी जिसे लोग "भूतिया हवेली" कहते थे। दिन में वह बिल्कुल सामान्य लगती, लेकिन रात होते ही वहां से अजीब आवाजें सुनाई देती थीं—दरवाजों के खुलने-बंद होने की आवाजें, धीमी हंसी और रहस्यमयी कदमों की आहट।

गाँव के सरपंच ने एक दिन घोषणा की कि जो कोई भी पूरी रात उस हवेली में पहरा देगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा। एक बहादुर लड़का, राहुल, इनाम जीतने के लिए तैयार हो गया।

रात को वह अपनी लालटेन और डंडा लेकर हवेली के अंदर गया। पहली मंजिल तक सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे ही वह सीढ़ियों से ऊपर जाने लगा, ठंडी हवा का एक झोंका आया और दरवाजा अपने आप बंद हो गया। राहुल ने खुद को हिम्मत दिलाई और आगे बढ़ा।

अचानक उसे लगा कि कोई उसके पीछे चल रहा है। उसने मुड़कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था। तभी उसे एक कमरे से धीमी-धीमी रोने की आवाज़ सुनाई दी। उसने दरवाजा खोला तो देखा कि एक पुराना झूला अपने आप हिल रहा था। राहुल के शरीर में सिहरन दौड़ गई, लेकिन वह अंदर गया। तभी एक सफेद साया उसकी तरफ बढ़ा और कर्कश आवाज में बोला, "तू यहां क्यों आया है?"

राहुल डर के मारे कांपने लगा, लेकिन हिम्मत कर बोला, "मैं जानना चाहता हूं कि तुम कौन हो?"

भूत ने कहा, "मैं इस हवेली का पुराना मालिक हूँ। मुझे धोखे से मार दिया गया था, और मेरी आत्मा अब तक इस घर में भटक रही है। जो भी यहां आता है, उसे मैं चेतावनी देता हूँ कि यह घर छोड़ दे!"

राहुल ने डरते-डरते कहा, "मैं तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए कुछ कर सकता हूँ?"

भूत ने कहा, "मुझे न्याय चाहिए। मेरी असली कहानी सबको बताओ।"

सुबह होते ही राहुल ने गांव में हवेली की पूरी सच्चाई बताई। गांववालों ने हवेली में पूजा करवाई और भूत की आत्मा को शांति मिली।

लेकिन... हवेली के पास से गुजरने वाले अब भी कहते हैं कि कभी-कभी वहां हल्की आहटें सुनाई देती है











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