भाग 1: गुड़िया वापस आ गई! माया, रोहन और आदित्य घबराकर वहीं रुक गए। गुड़िया को तो उन्होंने मिट्टी में दबा दिया था, फिर यह यहाँ कैसे आई? "यह... यह असंभव है!" माया फुसफुसाई। आदित्य ने धीरे-धीरे गुड़िया की ओर कदम बढ़ाए। जैसे ही उसने उसे छूने की कोशिश की, गुड़िया हवा में उठ गई और उसकी आँखें चमकने लगीं। "तुमने सोचा कि तुम मुझे हरा सकते हो?" गुड़िया की आवाज़ किसी बूढ़े आदमी की तरह गूँजी। भाग 2: एक और सुराग रोहन ने तेजी से डायरी निकाली और पन्ने पलटने लगा। तभी उसे एक पेज मिला जो पहले नहीं दिखा था—"गुड़िया तब तक ज़िंदा रहेगी, जब तक इसे बनाने वाले का आत्मा मुक्त नहीं होता।" "शर्मा जी की आत्मा अब भी बंधी हुई है," रोहन ने कहा। "तो हमें उसकी आत्मा को मुक्त करना होगा," माया बोली। भाग 3: शर्मा जी का सच तीनों फिर से जली हुई दुकान के पास गए और वहां खुदाई शुरू की। कुछ ही देर में उन्हें ज़मीन के नीचे एक पुराना, जला हुआ लकड़ी का बॉक्स मिला। "हो सकता है इसमें कुछ जरूरी हो," आदित्य ने कहा। उन्होंने बॉक्स खोला। अंदर एक पुरानी चाभी और एक तस्वीर थी। तस...
Bachon aur bado ke liye kahaniyon ka ek anokha safar – horror, suspense, aur general blogs ek hi jagah.
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