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 Namaste!  

Mera naam Taiyab Alam Siddiqui hai. Kahani Junction par aapko horror, suspense, bachon ke liye funny aur moral stories milengi. Is blog ka maqsad har umr ke logo ke liye rochak kahaniyaan dena hai.  


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सच्ची मेहनत का फल

 बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में रामु नाम का एक लड़का रहता था। रामु बहुत मेहनती और ईमानदार था, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। उसके माता-पिता खेती करके मुश्किल से घर चलाते थे। रामु पढ़ाई में बहुत अच्छा था, लेकिन पैसे की कमी के कारण वह ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाता था। ज्ञान की ओर पहला कदम रामु का सपना था कि वह बड़ा होकर एक विद्वान बने और अपने गाँव का नाम रोशन करे। लेकिन किताबें खरीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। गाँव में एक सेठ था, जिसके पास बहुत सारी किताबें थीं। रामु ने सोचा कि अगर वह सेठ के यहाँ कोई काम करे तो शायद उसे किताबें पढ़ने का मौका मिल जाए। रामु सेठ के पास गया और विनम्रता से बोला, "सेठ जी, मैं आपके यहाँ कोई भी काम करने को तैयार हूँ। बस बदले में मुझे आपकी लाइब्रेरी में बैठकर किताबें पढ़ने दें।" सेठ उसकी लगन देखकर प्रभावित हुआ और उसे रोज़ शाम को दुकान की सफाई करने का काम दे दिया। बदले में रामु को लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने की अनुमति मिल गई। मेहनत और लगन का जादू रामु हर दिन स्कूल से आकर सेठ की दुकान पर सफाई करता और फिर घंटों किताबें पढ़ता। ...

सच्ची लगन और मेहनत का जादू

  गाँव का होशियार लड़का बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होशियार और जिज्ञासु था। पढ़ाई में उसकी गहरी रुचि थी, लेकिन उसके माता-पिता गरीब थे और स्कूल की फीस भरना उनके लिए मुश्किल था। अर्जुन के पास किताबें खरीदने के पैसे भी नहीं थे, लेकिन वह कभी हार नहीं मानता था। गाँव में एक बूढ़े गुरुजी रहते थे, जो बहुत विद्वान थे। अर्जुन हर दिन उनके पास जाता और कहता, "गुरुजी, मुझे कुछ नया सिखाइए।" गुरुजी उसकी लगन देखकर प्रभावित हुए और उसे मुफ्त में पढ़ाने के लिए तैयार हो गए। मेहनत की सच्ची परीक्षा अर्जुन पढ़ाई में बहुत मेहनत करता था। वह दिन-रात पढ़ता और जो भी सीखता, उसे बार-बार दोहराता। लेकिन उसकी असली परीक्षा तब हुई जब गाँव में एक बड़ी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में पूरे जिले के बच्चे हिस्सा ले रहे थे, और विजेता को एक बड़े शहर में पढ़ाई करने का मौका मिलने वाला था। अर्जुन ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया। लेकिन उसके पास न तो अच्छी किताबें थीं, न ही कोई अन्य साधन। फिर भी, उसने अपनी मेहनत और गुरुजी के ज्ञान के बल पर ...

शापित शहर – एपिसोड 14: खुद से सामना

पिछले एपिसोड में: विराट को महसूस हुआ कि उसकी यादें अधूरी थीं। उसे यकीन था कि वह असली दुनिया से आया था, लेकिन जब उसने अपना प्रतिबिंब देखा, तो उसे एहसास हुआ— वह खुद को नहीं पहचान पा रहा था। फिर अर्णव ने सबसे बड़ा रहस्य खोला— "तुम इस खेल के पहले खिलाड़ी हो, विराट।" अब सवाल यह था— अगर विराट ही इस खेल की शुरुआत करने वाला था, तो क्या वह कभी इससे बाहर निकल सकता था? अध्याय 1: अतीत की परछाइयाँ विराट अर्णव की ओर देखने लगा। "तुम झूठ बोल रहे हो!" अर्णव ने गहरी साँस ली। "क्या सच को नकारने से वह बदल जाएगा?" "मैं असली हूँ। मैं हमेशा से असली दुनिया में था।" "तो मुझे एक सवाल का जवाब दो," अर्णव ने कहा। "तुम्हें पहली बार खेल के बारे में कैसे पता चला?" विराट के दिमाग में एक ज़ोरदार झटका लगा। "मैंने… मैंने इसे ऑनलाइन खोजा था।" "क्या तुम पक्का कह सकते हो?" विराट के माथे पर पसीना आ गया। अध्याय 2: पहला खिलाड़ी अचानक, हवा में एक हल्की गूँज उठी— एक पुरानी रिकॉर्डिंग की आवाज़। "मेरा नाम विराट है। अगर कोई यह स...